क्या आपका बच्चा जरूरत से ज़्यादा नॉन-वेज खा रहा है? एक्सपर्ट्स बता रहे हैं इसके 5 चौंकाने वाले नुकसान
2026-01-31 00:00:00
क्या आपका बच्चा जरूरत से ज़्यादा नॉन-वेज खा रहा है? आयुर्वेद के अनुसार जानिए इसके 5 बड़े नुकसान – विस्तार से आज की लाइफस्टाइल में बच्चों का झुकाव नॉन-वेज फूड की ओर तेज़ी से बढ़ा है। बर्गर, चिकन रोल, नगेट्स, फ्राई मछली जैसे फूड बच्चों को स्वाद में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन आयुर्वेद स्वाद से पहले शरीर की सहनशक्ति और पाचन क्षमता को देखता है।
आयुर्वेद के अनुसार, बच्चा छोटा वयस्क नहीं होता। उसका शरीर, पाचन तंत्र और मानसिक विकास एक अलग चरण में होता है। इसी कारण बच्चों के लिए भोजन के नियम भी अलग बताए गए हैं।
बच्चों की पाचन अग्नि क्यों होती है कमजोर?
आयुर्वेद में पाचन शक्ति को अग्नि कहा गया है। बच्चों में यह अग्नि—नाज़ुक अस्थिर जल्दी बिगड़ने वाली होती है।
नॉन-वेज का प्रभाव
- नॉन-वेज भोजन को आयुर्वेद में गुरु (भारी), स्निग्ध (चिकनाई युक्त) और मंद पचने वाला माना गया है।
- जब बच्चा बार-बार या अधिक मात्रा में नॉन-वेज खाता है, तो—भोजन पूरी तरह नहीं पचता
- शरीर में आम (toxins) बनता है
- पेट भारी रहता है
इसके लक्षण
- गैस और ब्लोटिंग
- उल्टी या मितली
- पेट दर्द
- कब्ज या दस्त
- भूख न लगना
- लंबे समय तक ऐसा रहने पर बच्चा कमजोर और सुस्त दिखने लगता है।
दोष असंतुलन: खासकर पित्त क्यों बढ़ता है?
आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन दोषों से बना है— वात पित्त कफ
नॉन-वेज भोजन पित्त दोष को बढ़ाने वाला माना जाता है। बच्चों में पित्त बढ़ने के संकेत
- जल्दी गुस्सा आना
- चिड़चिड़ापन
- अधिक पसीना
- मुंह में छाले
- त्वचा पर रैशेज
- नाक से खून आना
बच्चों का स्वभाव सामान्यतः शांत और कोमल होना चाहिए, लेकिन पित्त बढ़ने से उनका व्यवहार असंतुलित हो सकता है।
मानसिक और भावनात्मक विकास पर असर
आयुर्वेद भोजन को तीन श्रेणियों में बांटता है—
- सात्त्विक (शांत, शुद्ध)
- राजसिक (उत्तेजक)
- तामसिक (भारी, आलसी)
- अधिक नॉन-वेज को राजसिक-तामसिक माना जाता है।
- इसका बच्चों पर प्रभाव
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
- बेचैनी और अधीरता
- ज़्यादा जिद
- आक्रामक व्यवहार
- नींद में बाधा
पढ़ाई और सीखने की उम्र में यह मानसिक अस्थिरता बच्चों की ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है।
इम्यून सिस्टम क्यों कमजोर पड़ सकता है?
आयुर्वेद के अनुसार मजबूत इम्यूनिटी के लिए—
- साफ पाचन
- आम (toxins) का न बनना
- संतुलित दोष
- ज़रूरी हैं।
अधिक नॉन-वेज से क्या होता है?
- शरीर में आम जमा होता है
- लिवर और आंतों पर दबाव बढ़ता है
- शरीर रोगों से लड़ने में कमजोर होता है
परिणाम
- बार-बार सर्दी-जुकाम
- गले में संक्रमण
- एलर्जी
- स्किन प्रॉब्लम्स
आयुर्वेद मानता है कि बच्चों को हल्का, ताज़ा और सुपाच्य भोजन ही स्वस्थ रखता है।
भविष्य की जीवनशैली पर पड़ने वाला गहरा असर
आयुर्वेद कहता है—“बाल्यावस्था में बनी आदतें जीवनभर साथ चलती हैं।”
बचपन में अत्यधिक नॉन-वेज खाने से आगे चलकर—
मोटापा
पाचन संबंधी रोग
हार्मोनल असंतुलन
लाइफस्टाइल डिज़ीज़ का खतरा बढ़ सकता है।
साथ ही, बच्चा स्वाद का आदी हो जाता है और साधारण, पौष्टिक भोजन से दूरी बनाने लगता है।
आयुर्वेद क्या सुझाव देता है?
नॉन-वेज पूरी तरह वर्जित नहीं , लेकिन सीमित मात्रा में रोज़ नहीं सही उम्र और मौसम में
भोजन में संतुलन—
- दाल
- सब्ज़ियां
- चावल/रोटी
- घी
- दूध और फल
- बच्चे की प्रकृति (वात-पित्त-कफ) के अनुसार डाइट
- घर का बना, ताज़ा और गर्म भोजन