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"न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।" (Bhagavad Gita, Chapter 4, Verse 38)

“There is nothing as purifying in this world as knowledge.”

Neck Pain: Causes & Treatment

Posted 26 September, 2025

Neck Pain: Causes & Treatment

Neck pain is a common complaint that can have a variety of causes. The neck, also known as the cervical spine, is a complex structure made up of bones, joints, muscles, and nerves that support your head and facilitate motion. Abnormalities, inflammation, or injury in any of these components can be the source of pain, and it can also be referred to as pain from other areas of the body.

Usually neck pain is not a serious condition and subsides within a few days with some physical exercises. But in certain cases, it may indicate serious injury or illness and require medical attention. If the pain continues for more than a week, is severe, or is accompanied by other symptoms, seek medical attention immediately.

Causes of Neck Pain

Poor posture

Sitting or standing in a hunched position for long periods of time can lead to muscle strain and tension in the neck. This can also happen from carrying a heavy bag or purse on one shoulder, which can cause the muscles on one side of the neck to become fatigued and sore.

Injury or trauma

Whiplash, an injury that occurs from sudden jerking or jolting of the head, is a common cause of neck pain. This type of injury can happen in a car accident, sports accident, or any other situation where the head is suddenly and forcefully moved.

Other causes of neck pain include degenerative conditions such as

  • Osteoarthritis
  • Herniated discs
  • Spinal stenosis

These conditions can cause pain, stiffness, and limited range of motion in the neck. Apart from the above, there are also some rare causes that cause neck pain, such as

  • Fractures
  • Infection
  • Tumor
  • Inflammation (probably in ankylosing spondylitis or meningitis)

Symptoms of Neck Pain

The symptoms of neck pain include

  • Pain that often worsens by holding the head in one place for long hours, examples include driving or sitting in front of a screen.
  • Muscle tightness and spasms
  • Difficulty in moving the head
  • Headache

Treatment for Neck Pain

Neck pain can have many causes, and it is important to identify the root cause in order to determine the best course of treatment. With proper treatment and management, most people with neck pain can find relief and improve their quality of life. It is also important to take steps to prevent neck pain, such as maintaining good posture, exercising regularly, and avoiding injury or trauma to the neck.

Treatment for neck pain will depend on the cause. In most cases, rest, ice or heat therapy, and over-the-counter pain medication can help to relieve symptoms. Stretching and gentle exercises can also help to improve flexibility and strength in the neck muscles.

If your neck pain is caused by poor posture, it is important to work on correcting your posture. This may include sitting and standing with your shoulders back and your head held high. You can also try doing exercises to strengthen the muscles in your neck and upper back to help improve your posture.

If your neck pain is caused by an injury or trauma, it is important to seek medical attention as soon as possible. For more chronic neck pain caused by degenerative conditions, treatment may include medication to reduce inflammation, corticosteroid injections, and even surgery in more severe cases.

Natural Treatment Methods for Neck Pain

  • Physical therapy
  • Chiropractic care
  • Acupuncture
  • Massage therapy
  • Transcutaneous Electrical Nerve Stimulation (TENS)

When to see a doctor?

It is important to note that if you are experiencing severe or persistent neck pain, it is important to see a doctor or a physical therapist to determine the cause and appropriate treatment.

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गलसुआ क्या है? जानें, इसके लक्षण, कारण और उपचार

Posted 06 August, 2022

गलसुआ क्या है? जानें, इसके लक्षण, कारण और उपचार

गलसुआ या कंठमाला एक प्रकार का विषाणु जनित रोग है, जो मुख्य रूप से लार ग्रंथियों को प्रभावित करता है। यह बीमारी लार, नासिक के स्राव और निकट संपर्क के माध्यम से संक्रमित व्यक्ति से असंक्रमित व्यक्ति में फैलता है। अधिकतर मामलों में गलसुआ 5 से 15 आयु वर्ग के बच्चों में अधिक देखने को मिलता है। गलसुआ का मुख्य लक्षण लार ग्रंथियों में होने वाली एक प्रकार की सूजन है, जिससे रोगी का चेहरा हम्सटर (Hamster) जैसा दिखने लगता है।

गलसुआ या कंठमाला कैसे प्रसारित होता है?

गलसुआ या कंठमाला का वायरस लार ग्रंथियों को प्रभावित करता हैं। इन ग्रंथियों को पैरोटिड ग्रंथियां के नाम से भी जाना जाता है। यह ग्रंथियां लार बनाने का काम करती हैं । इन ग्रंथियों या ऊपरी श्वसन मार्ग में विषाणु के प्रवेश करने पर यह संक्रमित हो जाती हैं। जिससे यह लार या श्वसन स्राव (जैसे बलगम) के संपर्क में आने से एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे असंक्रमित व्यक्ति में फैलता है। इसके अलावा गलसुआ वस्तुओं के संपर्क में आने से भी फैल सकती है, जैसे कि खिलौने या पानी पीने के गिलास, जो किसी बीमार व्यक्ति द्वारा संक्रमित हो गए हैं।

क्या होते हैं गलसुआ के लक्षण?

एक बार जब कोई व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो इस स्थिति में गलसुआ के लक्षण आमतौर पर 14 से 25 दिनों के अंदर विकसित हो जाते हैं। गलसुआ का सबसे आम लक्षण पैरोटिड ग्रंथियों की सूजन है, जो लार उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पैरोटिड ग्रंथियां कान के ठीक नीचे, चेहरे के दोनों ओर स्थित होती हैं। किसी कारणवश जब वायरस इन ग्रंथियों को प्रभावित करते हैं , तो आमतौर पर एक या दोनों तरफ की ग्रंथियों (गाल एवं जबड़े वाले हिस्सों) में दर्द, सूजन, टेंडरनेस (छूने पर दर्द) और निगलने में कठिनाई आदि समस्या होती है। इसके अतिरिक्त गलसुआ के अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, जो निम्नलिखित हैं

  • बीमार महसूस करना।
  • तेज बुखार आना।
  • चबाने में कठिनाई महसूस करना।
  • तेज सिरदर्द होना।
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना।
  • मुंह सूखना।
  • पेट में हल्का दर्द होना।
  • शारीरिक थकान और कमजोरी महसूस करना।
  • भूख में कमी का एहसास होना।

गलसुआ होने का क्या कारण है?

यह बीमारी ऐसे लोगों के श्वसन स्राव (जैसे लार) के माध्यम से संचरित होता है, जो पहले से ही इससे ग्रसित है। यह वायरस वायुमार्ग से लार ग्रंथियों तक जाता है और उसे संक्रमित करता है। जिससे ग्रंथियां में सूजन आ जाती हैं। इसके कारण निम्नलिखित हैं

  • छींक या खांसी।
  • एक ही व्यक्ति के टेबलवेयर का इस्तेमाल करना उसपर भोजन करना।
  • संक्रमित व्यक्ति के साथ खाना-पीना साझा करना।
  • चुंबन आदि।

गलसुआ वायरस से संक्रमित व्यक्ति लगभग 15 दिनों तक (लक्षण शुरू होने से 6 दिन पहले और शुरुआत के 9 दिन बाद तक) संक्रामक होते हैं। दरअसल गलसुआ वायरस पैरामाइक्सोवायरस परिवार से संबंध रखता है, जो संक्रमण का एक सामान्य कारण है, खासकर बच्चों में।

गलसुआ का निदान किस प्रकार किया जाता है?

डॉक्टर आमतौर पर लार ग्रंथियों की सूजन से गलसुआ का इलाज करते हैं। लेकिन यदि ग्रंथियां में सूजन नहीं होती है, तो इस स्थिति में डॉक्टर अन्य लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं। यदि उन्हें किसी भी तरह का गलसुआ होने का संदेह होता है, तो वह वायरस को कल्चर करते हैं। कल्चर, गाल या गले के अंदर की तरफ स्वाब करके किया जाता है। स्वाब बलगम और कोशिकाओं को इकट्ठा करता है और इसे गलसुआ वायरस के परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है। गलसुआ के अलावा, कोई अन्य संक्रमण भी लार ग्रंथियों की सूजन का कारण बन सकता है।

गलसुआ के प्रसार को कैसे रोकें?

  • अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोएं।
  • लक्षण दिखने के 5 दिन तक काम/स्कूल न जाएं।
  • छींकते या खांसते समय नाक और मुंह को रुमाल या टिशू से ढकें।
  • समय पर टीका जरूर लगवाएं।

एमएमआर (measles-mumps-rubella) का टीका किसे लगवाना चाहिए?

  • यदि आप मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं तो आपको टीका लगाया जाना चाहिए।
  • प्रसव उम्र की गर्भवती महिलाएं।
  • दूसरे जगहों पर कॉलेज या अन्य स्टडी के लिए जाना।
  • अस्पतालों, चिकित्सा सुविधाओं, बच्चों के केंद्रों या स्कूल में काम करने पर।
  • विदेश यात्रा की योजना बनाने पर।

एमएमआर वैक्सीन के दुष्प्रभाव-

  • एमएमआर वैक्सीन बहुत सुरक्षित और प्रभावी है।
  • ज्यादातर लोगों को इस टीके से किसी भी तरह का दुष्प्रभाव नहीं होता है। हालांकि, कुछ लोगों को हल्का बुखार, रैशेज या जोड़ों में दर्द हो सकता है।
  • दुर्लभ मामलों में, एमएमआर वैक्सीन प्राप्त करने वाले बच्चों में बुखार के कारण दौरे पड़ सकते हैं। हालांकि, यह दौरे दीर्घकालिक समस्याओं से जुड़े नहीं हैं।

गलसुआ के लिए घरेलू उपचार-

  • अदरक-अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण मौजूद होते हैं, जो सूजन और दर्द से छुटकारा दिलाने का काम करते हैं। इसके लिए सोंठ के पाउडर और पानी का पेस्ट बनाकर सूजन वाली जगह पर लगाएं। ऐसा करने से लाभ मिलता है।
  • एलोवेरा-एलोवेरा गलसुआ के लिए एक उत्कृष्ट उपाय है क्योंकि इसमें ऑक्सीकरण रोधी और जीवाणुरोधी गुण पाए जाते हैं। इसके लिए एलोवेरा के ताजे पत्तों को छील लें। अब इसके जेल को निकालकर प्रभावित हिस्सों पर रगड़ें। ऐसा करने से सूजन और दर्द कम होता है।
  • ठंडा या गर्म सिकाई-गलसुआ के कारण होने वाली सूजन और ग्रंथि के दर्द से राहत पाने के लिए ठंडा या गर्म सिकाई करना एक प्रभावी तरीका है।
  • मेथी के बीज-मेथी के बीज को शतावरी के साथ पीसकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगाएं। ऐसा करने से इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट दर्द एवं सूजन से राहत दिलाता है।
  • नीम के पत्ते-नीम गलसुआ के इलाज में बहुत अच्छा काम करता है। इसके लिए नीम की पत्तियों को मसलकर उसमें थोड़ा हल्दी पाउडर मिला लें। अब इस मिश्रण को थोड़े से पानी के साथ पीसकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को सूजन वाली जगह पर लगाएं। इससे गलसुआ में काफी आराम पहुंचता है।

खट्टे खाद्य पदार्थों से बचें-

  • खट्टे फल और पनीर से दूर रहें। इसके बजाय, पानी और सब्जी का सूप पिएं।
  • उचित आराम-
  • बुखार दूर होने तक पर्याप्त आराम करें।
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सर्वाइकल पेन के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार

Posted 17 March, 2022

सर्वाइकल पेन के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार

इन दिनों कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनकी कुछ साल पहले तक किसी बीमारी की श्रेणी में गणना नहीं होती थी। लेकिन अब बड़ी तकलीफ बनकर उभर रही हैं। इन्हीं बीमारियों में से एक हैं सर्वाइकल पेन। जिसका मुख्य कारण आधुनिक खान-पान और गलत लाइफ स्टाइल को फॉलो करना है। जिसके कारण गर्दन दर्द (सर्वाइकल पेन) की समस्या बेहद आम हो गयी है। इतनी आम कि यह बुजुर्ग लोगों की अपेक्षा बच्चे और युवाओं में अधिक देखने को मिलती है। इस समस्या के मुख्य कारण हैं- घंटों तक कम्प्यूटर पर काम करना, ख़राब मुद्रा एवं झुककर बैठना और गलत तरीके से भारी वजन उठाना आदि।

 
क्या होता है सर्वाइकल पेन?

सर्वाइकल पेन हड्डियों से जुड़ी एक समस्या होती है। जिसके होने पर गर्दन, कंधों, सिर आदि में गंभीर दर्द होता है। जिसे सर्वाइकल का दर्द कहा जाता है। यह समस्या किसी को भी हो सकती है। आज के दौर में अनियमित दिनचर्या के कारण लगभग हर तीसरे व्यक्ति को सर्वाइकल जैसी परेशानी से गुजरना पड़ता है।

दूसरे शब्दों में, गर्दन के हिस्से वाली रीढ़ की हड्डी (सर्वाइकल स्पाइन) के जोड़ों और डिस्क में समस्या होने से सर्वाइकल पेन की स्थिति उत्पन्न होने लगती है। सर्वाइकल डिस्क हड्डियों के बीच के दर्द को अवशोषित करती है। गर्दन की हड्डियां, स्नायुबंधन (ligaments) और मांसपेशियां यह सभी अंग सिर का समर्थन करती हैं। साथ ही गति को सामान्य बनाए रखती हैं। ऐसे में उस स्थान पर सूजन, चोट या किसी भी प्रकार का असामान्यता होने पर गर्दन में दर्द या अकड़न होने लगती है। इसे दूर करने के लिए फिजियोथेरेपी या व्यायाम की आवश्यकता पड़ सकती है।

 
सर्वाइकल पेन के लक्षण

सर्वाइकल दर्द में मुख्य रूप से कंधे और गर्दन के आसपास के क्षेत्रों में दर्द होता है। इसके अलावा अन्य लक्षण भी देखने को मिलते हैं जो इस प्रकार हैं:

  • हाथों और पैरों में कमजोरी या झुनझुनी होना।
  • समन्वय की कमी के कारण चलने फिरने में कठिनाई होना।
  • मांसपेशियों में ऐंठन होना।
  • गर्दन में अकड़न या खिंचाव होना।
  • सिर के पिछले हिस्से में दर्द महसूस करना।
  • मूत्राशय और आंतों का अनियमित रूप से कार्य करना।
  • शरीर का वजन घटना।
  • गर्दन में लगी चोट, आघात या कोई झटका आना।
  • स्पाइनल कॉर्ड (मेरुदंड) के बीच में दबाव पड़ने पर हिप या थाईज के आसपास सुन्नपन महसूस करना।
 
सर्वाइकल दर्द होने के कारण

सर्वाइकल दर्द, सर्वाइकल स्पोंडिलोलिसिस या ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण होने वाला दर्द होता है। इस स्थिति में हड्डियों, डिस्क या जोड़ों में परिवर्तन होने लगते हैं। जो प्रायः गर्दन से जुड़े होते हैं। सर्वाइकल दर्द का प्रमुख कारण उपास्थि और हड्डियों में घिसाव के कारण हुई टूट-फूट भी होता है। ऐसी समस्या ज्यादातर उम्र बढ़ने वाले लोगों में पाए जाती है। हालांकि, यह अन्य कारकों के कारण छोटे और युवकों में भी होता है। आइए जानते हैं इन्हीं कारकों के बारे में;

 
गर्दन का अधिक उपयोग करना

कुछ लोगों के दैनिक काम में कठिन और थकानेवाली गतिविधियां शामिल होती हैं। जो रीढ़ के हड्डियों पर दबाव डालती हैं। इसमें लिए भारी वजन उठाना, झुककर काम करना, गलत मुद्रा में बैठना आदि गतिविधियां शामिल हैं।

 
चोट के कारण

गर्दन या रीढ़ की हड्डी में पुरानी चोट लगने की वजह से भविष्य में व्यक्ति सर्वाइकल पेन से ग्रसित हो सकता हैं।

 
हर्नियेटेड डिस्क

इस तरह के सर्वाइकल दर्द में स्पाइनल डिस्क में दरारों का विकास होने लगती हैं। यह दरारें आंतरिक कुशनिंग सामग्री के रिसाव को रास्ता देती हैं। परिणामस्वरूप रीढ़ की नसों और मांशपेशियों पर दबाव पड़ता है। इस प्रकार से सर्वाइकल दर्द के लक्षण बांहों में दर्द एवं सुन्नता ला सकते हैं।

 
निर्जलित स्पाइनल डिस्क

जब रीढ़ के बीच की डिस्क कई बार सूख जाती है। जिसके कारण उनके रगड़ने से तीव्र दर्द होने लगता है।

 
डिस्क में उभार

कभी-कभी टूटी हुई डिस्क की तरह एक उभरी हुई डिस्क शरीर के तंत्रिका तंत्र पर दबाव डालती है। जिसके फलस्वरूप रीढ़ के ऊपरी हिस्सों में दर्द होने लगता है।

 
रीढ़ का असामान्य रूप से टेढ़ा होना

सामान्य रूप से बचपन से ही उम्र बढऩे के साथ-साथ मेरूदंड की लंबाई में समान अनुपात में वृद्धि होती है। जिससे शरीर में संतुलन बना रहता है। लेकिन इसके विपरीत किसी कारण मेरूदंड के एक हिस्से में ज्यादा वृद्धि और दूसरे हिस्से में कम वृद्धि हो तो इस अनियमित वृद्धि के कारण शारीरिक संतुलन बिगड़ जाता है। जिससे शरीर गर्दन दर्द, कमर दर्द और अन्य गंभीर रोगों से ग्रसित हो जाता है।

 
सर्वाइकल पेन के सामान्य कारण 
  • लगातार बैठकर घंटो तक काम करना।
  • बैठने की मुद्रा का सही न होना।
  • मांसपेशियों में खिंचाव आना।
  • शरीर में अत्याधिक कमजोरी होना।
  • शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी होना।
  • मांशपेशियों में ऐंठन होना।
  • खराब पोस्चर में बैठकर किताब पढ़ना या टी बी देखना।
  • व्यायाम करते समय गर्दन को सही तरीकों से न मोड़ना।
  • घंटों तक गर्दन का एक ओर झुकाव का होना।
  • झटके से भारी वजन उठाना।
सर्वाइकल पेन के घरेलू उपचार
आइस पैक

आइस पैक (ice pack) कई तरह के दर्द में मदद करता है। इसलिए आइस पैक को प्रभावित अंग पर लगाने से काफी आराम मिलता है। इसके अलावा आइस पैक गर्दन या शरीर के अन्य किसी हिस्से में दर्द के साथ सूजन को भी खत्म करता है।

सेंधा नमक

एक कटोरी एप्सम साल्ट (सेंधा नमक) को हल्के गर्म पानी से भरे बाथटब में डालें। जबतक पानी की गर्माहट रहे तब तक बाथटब में बैठे रहें। ऐसा करने से सर्वाइकल पेन में आराम मिलता है।

लहसुन

लहसुन में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, विटामिन सी आदि गुण मौजूद होते हैं। जो बदन दर्द में काफी राहत प्रदान करते हैं। इसके लिए प्रतिदिन लहसुन की 2 कलियों को भूनकर पानी के साथ सेवन करें। इसके अलावा लहसुन की कम से कम 8 से 10 कलियां लेकर अच्छे से पेस्ट बनाकर उसे प्रभावित अंग पर लगाएं। ऐसा करने से कुछ दिनों में सर्वाइकल दर्द से राहत मिलने लगती है।

अदरक

सर्वाइकल पेन के लिए अदरक को गर्म पानी में भिगोकर कुछ देर रखें। अब उस पानी में शहद मिलाकर सेवन करें। ऐसा करने से सर्वाइकल पेन या शरीर के अन्य हिस्से के दर्द में राहत मिलती है। तत्काल राहत पाने के लिए अदरक के तेल से गर्दन या प्रभावित अंग की मालिश करें।

एसेंशियल ऑयल

लैवेंडर और तुलसी के तेल से बने मिश्रण को गर्दन या प्रभावित अंगों पर हल्के हाथों से मसाज करें। ऐसा करने से सर्वाइकल पेन में शीघ्र ही आराम होता है।

हींग एवं कपूर मिश्रित सरसों का तेल

सर्वाइकल पेन होने पर कपूर और हींग की बराबर मात्रा लेकर सरसों के तेल में फेटकर पेस्ट बना लें। अब इस मिश्रण से गर्दन या शरीर के प्रभावित हिस्सों पर हल्के हाथों से मसाज करें। ऐसा करने से दर्द में आराम पहुंचता है।

गर्म सिकाई करें

किसी भी तरह के दर्द से राहत पाने के लिए गर्म पानी से सिकाई करना एक अच्छा विकल्प है। इससे रक्त का संचरण भी ठीक हो जाता है। इसके अलावा गर्म पानी से शावर लेने पर भी गर्दन दर्द में फायदा करता है। 

हल्दी

हल्दी में एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं। जो शरीर के किसी भी हिस्से में उत्पन्न दर्द एवं सूजन को नैचुरल तरीके से खत्म कर देते हैं। इसके लिए रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में एक चम्मच हल्दी डालकर गर्म करें। थोड़ा ठंडा होने के बाद उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करें। ऐसा करने से सर्वाइकल पेन में आराम मिलता हैं। साथ ही ब्लड सर्कुलेशन में भी सुचारू रूप से काम करता है।

तिल का तेल

तिल के तेल में भरपूर मात्रा में कॉपर, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, जिंक, विटामिन डी आदि गुण पाए जाते हैं। जो सर्वाइकल पेन से राहत दिलाने का काम करते हैं। इसके लिए रोजाना तिल के तेल को हल्का गुनगुना करके हल्के हाथों से प्रभवित अंगों का मालिश करें। ऐसा करने से आपका दर्द काफी हद तक कम हो जाता है।

सेब का सिरका

सेब के सिरके को गर्दन दर्द के लिए एक बेहतरीन घरेलू उपचार माना जाता है। इस पर किए गए एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक, सेब का सिरका जोड़ों का दर्द कम करने में मदद करता है। साथ ही यह गठिया और सर्वाइकल पेन में सुधार करता हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि सेब के सिरके से गर्दन का र्दद ठीक हो सकता है।

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