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हार्ट अटैक

Posted 25 May, 2022

हार्ट अटैक

हार्ट अटैक – इन दिनों हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बीमारी इतनी आम हो गई है कि हर चौथा व्यक्ति इससे पीड़ित है। दिल्ली के शालीमार स्थित मैक्स अस्पताल द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, 21वीं सदी में 40 साल से कम उम्र के 40 प्रतिशत युवा इसके शिकार हो रहे हैं। जिसका मुख्य कारण है सेहत का ठीक से ख्याल न रखना तथा व्यस्त दिनचर्या के चलते इसके शुरूआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देना। जिसका परिणाम अक्सर जानलेवा साबित होता है।

 

क्या है हार्ट अटैक?

 

यह दिल से जुड़ी समस्याओं में से प्रमुख बीमारी है। जिसे दिल का दौरा भी कहते हैं। जब किसी व्यक्ति के दिल तक रक्त पहुंचाने वाली नसों में ब्लॉकेज हो जाता है या किसी भी कारण से दिल तक पहुंचने वाला रक्त प्रवाह (Blood Flow) धीमा पड़ जाता है। ऐसे में दिल पर दबाव पड़ने लगता है। यह बाधित रक्त प्रवाह दिल की मांसपेशियों को कमजोर या पूरी तरह नष्ट कर देता है। इसी स्थिति का परिणाम दिल का दौरा या हार्ट अटैक होता है।

 

हार्ट अटैक के कारण:

 

इसके आने के कई कारण होते हैं जिनमें से मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-

 
धमनी में प्लाक का जमना (Arterial Plaque)-

धमनी में प्लाक का होना भी हार्ट अटैक आने का कारण होता है। इसमें धमनियों (Arteries) के भीतर प्लाक जम जाता है, जो ब्लॉकेज होने लगता है। यह ब्लॉकेज वसा (तरल पदार्थ), कॉलेस्ट्रॉल और अन्य तत्वों के बनने के कारण होती है। धमनियों में ठोस पदार्थ बनने के कारण ब्लड सर्कुलेशन होने में परेशानी आती है। यहां से इसके खतरे की शुरूआत होती है।

 
कॉलेस्ट्राल का अधिक मात्रा में होना- 

शरीर में कॉलेस्ट्राल की मात्रा अधिक होने पर भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। अत: ऐसे व्यक्ति को अपने स्वास्थ और शरीर द्वारा मिल रहे संकेतो पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

 
उच्च रक्तचाप का होना-

दिल का दौरा यानि हार्ट अटैक उच्च रक्तचाप का परिणाम भी हो सकता है। इसी कारण बी.पी. की समस्या से ग्रस्त लोगों को उच्च रक्तचाप का इलाज जरूर कराना चाहिए।

 
तनाव पूर्ण जीवन-

माना जाता है कि ज्यादा तनाव लेना भी कई बार हार्ट अटैक जैसी बीमारी को जन्म देता है। क्योंकि ऐसे में हम अपने स्वास्थ्य से नकारात्मक अथार्त विपरीत कार्य करने लगते हैं। 

 
जेनेटिक हार्ट अटैक- 

अगर परिवार में किसी को हार्ट अटैक आ चुका होता है। ऐसे में उस व्यक्ति के बाद परिवार के अन्य सदस्यों में भी हार्ट अटैक आने की संभावना बढ़ जाती है।

 
धूम्रपान एवं तंबाकू का सेवन करना-

ऐसे व्यक्ति को हार्ट अटैक आने की संभावना अधिक रहती है, जो अत्यधिक मात्रा में धूम्रपान एवं तंबाकू का सेवन करता है।

 
डायबिटीज-

डायबिटीज यानि हाई शुगर एक समय के बाद हार्ट की नसों को डैमेज करने लगता है। इसके कारण भी हार्ट अटैक आता है।

 

हार्ट अटैक के लक्षण:

 

हार्ट अटैक से पहले मानव-शरीर कुछ ऐसे लक्षण देता है, जो इसके घटने का संकेत देते हैं। इनपर अगर ध्यान दिया जाए तो समय रहते हार्ट अटैक को रोका सकता है।

 
छाती में तेज दर्द होना-

छाती में कहीं भी तेज दर्द होना दिल के दौरे का प्रमुख लक्षण है। बहुत बार हम इसे सामान्य दर्द समझ कर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो आगे चल कर नुक्सानदायक साबित हो सकता है।

 
पसीना आना-

दिल का दौरा पड़ने पर अक्सर लोगों को बहुत पसीना आता है। इसके साथ ही उन्हें घबराहट भी महसूस होती है। जो हार्ट अटैक के मुख्य लक्षणों में से एक है।

 
सांस लेने में कठिनाई होना- 

लंबी सांस लेना, सांस लेने में कठिनाई होना या सांसे फूलना भी दिल का दौरा पड़ने का लक्षण हो सकता है।

 
उल्टी होना-

कुछ लोगों को दिल का दौरा पड़ने से पहले उल्टी भी होती है। इसलिए अगर किसी को छाती में दर्द के बाद उल्टी हो या उल्टी जैसा महसूस हो तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

 
सूजन-

शरीर के सभी आंतरिक अंगों में रक्त पहुंचाने के लिए जब दिल को अधि‍क मेहनत करनी पड़ती है तो शि‍राएं (veins) फूल जाती हैं और उनमें सूजन आने लगती है। इसका असर पैर के पंजे और शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन के रूप में नजर आता है। यह भी हार्ट अटैक का एक मुख्य लक्षण है।

 

हार्ट अटैक को ठीक करने व इससे बचने के घरेलू उपाय:

 

हार्ट अटैक का मुख्य कारण हार्ट ब्लॉकेज है। जिसे खोलने के लिए इन घरेलू तरीकों का प्रयोग लाभदायक हो सकता है।

 
अनार का सेवन है फायदेमंद-

अनार में फाइटोकेमिकल्स होता है, जो एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में धमनियों की परत को क्षतिग्रस्त होने से रोकता है। रोजाना एक कप अनार के रस का सेवन करें। हार्ट ब्लॉकेज के लक्षणों से राहत पाने में भी अनार का घरेलू उपाय फायदेमंद होता है।

 
लहसुन का प्रयोग है लाभदायक-
  • लहसुन बंद धमनियों को साफ करने के लिए सबसे अच्छे उपायों में से एक है। यह रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है, और रक्त संचार में सुधार लाता है।
  • लहसुन की कुछ कली को काटकर एक कप दूध में मिलाकर उबाल लें। थोड़ा ठण्डा होने पर सोने से पहले पिएं। इसलिए हार्ट अटैक की बीमारी से ग्रस्त लोग अपने आहार में लहसुन को शामिल कर सकते हैं।
 
अर्जुन वृक्ष की छाल है मददगार-

हार्ट से जुड़ी बीमारियों जैसे कि आर्टरी में ब्लॉकेज, हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और कोरोनरी धमनी की बीमारी (Coronary artery disease) के इलाज में अर्जुन वृक्ष की छाल बेहद फायदेमंद होती है। इसकी छाल में प्राकृतिक ऑक्सिडाइजिंग होता है। इसी कारण हार्ट अटैक से बचने के उपाय में अर्जुन की छाल का औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है।

 
नींबू का उपयोग है आरामदायक-

नींबू विटामिन-सी से भरपूर एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट पदार्थ है। यह रक्तचाप में सुधार लाने और धमनियों की सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा नींबू ब्लड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और धमनियों को साफ करने में भी सहायता करता है। इसके लिए आप गुनगुने पानी के एक गिलास में थोड़ा-सा शहद, काली मिर्च पाउडर और एक नींबू का रस मिला लें। कुछ हफ्तों के लिए इसे दिन में एक या दो बार लेते रहें।

 
राहत दिलाती है लाल मिर्च-

लाल मिर्च में मौजूद कैप्सेसिन नामक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल या एलडीएल से दिल को बचाता है। यह रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है, जो धमनियों के बंद होने का मुख्य कारण हैं। इसके अलावा यह ब्लड सर्कुलेशन में सुधार कर, दिल के दौरे और स्ट्रोक के खतरे को भी कम करता है

 

हार्ट अटैक का आधुनिक ईलाज:

 
ईसीजी कराना-

ईसीजी के द्वारा दिल की धड़कनों की स्थिति का पता लगाया जाता है। ताकि अगर कोई दिक्कत हो तो उसे ठीक किया जा सके। इसलिए ईसीजी को हार्ट अटैक के इलाज का पहला बिंदु माना जाता है।

 
बाई पास सर्जरी कराना-

दिल के दौरे का इलाज बाईपास सर्जरी के द्वारा भी किया जाता है। इस सर्जरी में हार्ट की नसों में हुई ब्लॉकेज को खोल कर दिल तक पहुंचने वाले रक्त प्रवाह को ठीक किया जाता है।

 
पेसमेकर का इस्तेमाल करना-

हार्ट अटैक का इलाज पेसमेकर की सहायता से भी किया जाता है। क्योंकि पेसमेकर दिल की धड़कनों को नियमित करने में सहायक होता है।

 
ह्रदय प्रत्यारोपण सर्जरी कराना-

हार्ट अटैक का इलाज किसी भी अन्य तरीके से संभव न होने पर डॉक्टर ह्रदय प्रत्यारोपण सर्जरी (Heart Transplant  Surgery) करने की सलाह देते हैं। इस सर्जरी के जरिए मरीज को नई ज़िंदगी दी जाती है।

 
दवाइयां लेना- 

कई बार हार्ट अटैक का इलाज दवाईयों के द्वारा भी किया जाता है। इस दौरान डॉक्टर व्यक्ति को उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल लेवल आदि को नियंत्रित करने की दवाएं देते हैं। ये दवाईयां हार्ट अटैक की संभावना को काफी हद तक कम करने में मदद करती हैं।

 

हार्ट अटैक से बचने के लिए ध्यान रखें ये सावधानियां-

 
  • भोजन में कम से कम ऑयल और देशी घी का सेवन करें। इसके अलावा डाल्डा घी का सेवन कतई न करें। क्योंकि इनका अधिक सेवन धमनियों के ऊपर एक परत के रूप में जम जाता है और रक्त के प्रवाह पर बुरा असर डालता है।
  • मीठा सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ने लगता है। इससे रक्त की धमनियों में थक्के बन सकते हैं, जो आगे चलकर शरीर के लिए घातक साबित होता है।
  • चिंता, तनाव, अवसाद आदि से दूर रहें।
  • प्रतिदिन 7-8 घण्टे की नींद अवश्य लें।
  • धूम्रपान, तंबाकू, शराब आदि का सेवन न करें। क्योंकि इनका सीधा प्रभाव दिल की धमनियों पर पड़ता है।

कब जाएं डॉक्टर के पास?

हृदय रोग के इन लक्षणों के महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए। क्योंकि ये शुरुआती दौर के हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं।

 
  • छाती के बीचों-बीच दर्द होना तथा समय के साथ उस दर्द के बढ़ते रहने पर।।
  • छाती पर असहज दबाव महसूस होने पर।
  • बेचैनी या ज्यादा पसीना आने पर।
  • छाती में दर्द के बाद उल्टी या दस्त होने पर।
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